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Mahrishi Dayanand Ka Sanskrit Sahitya Evm Rashtra Ko Yogdan
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Mahrishi Dayanand Ka Sanskrit Sahitya Evm Rashtra Ko Yogdan
महर्षि दयानन्द का संस्कृत साहित्य एवं राष्ट्र को योगदान 
Author Dr. Raghuvir Vedalankar
ISBN 978-81-7854-249-2
Edition 2013
Language Hindi

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Discription
प्रस्तुत पुस्तक किसी एक ही विषय पर केन्द्रित नहीं है, अपितु महर्षि दयानन्द विषयक अनेक लेखों का संग्रह इसमें किया गया है। महर्षि दयानन्द समाज सुधारक होने के साथ परम वैयाकरण, वेद वेत्ता, वेद भाष्याकार स्वाधीनता के उद्घोषक भी थे। उन्होंने संस्कृत तथा वेद विषय में अविस्मरणीय योगदान दिया है। प्रस्तुत पुस्तक में सम्मान्य विद्वानों ने स्वामी जी के राष्ट्रिय एवं वेद विषयक योगदान को विभिन्न रूपों में विद्वतापूर्ण ढंग से प्रतिपादित किया है। पुस्तक में 44 लेख हैं। इन सबका पृथक्-पृथक् विश्लेषण तो यहाँ सम्भव नहीं। संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है कि इस पुस्तक में महर्षि के योगदान को निम्न रूपों में देखा जा सकता है:
(1) महर्षि का वेदा विषयक योगदान।
(2) महर्षि का व्याकरण, दर्शन शिक्षा, भाषा विषयक योगदान।
(3) महर्षि के ईश्वर, सृष्टि, राजनीति आदि विषयों पर विचार।
(4) महर्षि का अन्य सामाजिक योगदान।
विनम्र श्रद्धाञ्जलि
अनुङ्ग हिमालयशृङ्गतुल्य उज्जवल महान्। 
गम्भीर परम पावन चरित गंगा समान।।
ब्रह्मचर्यसाक्षात् दिव्यजीवन अनूप। 
पाखण्डदम्भ के लिए उग्र विद्रोह रूप।।
हे तेजस्वी, हे तत्त्वदर्शी, हे सत्यकाम। 
हे युगदृष्टा, युगा-युग तक हमार तुम्हें प्रणाम।।
(राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर)
 

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