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Prarambhika Bauddhadarshan Evm Manavavad
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Prarambhika Bauddhadarshan Evm Manavavad
प्रारम्भिक बौद्धदर्शन एवं मानववाद 
Author Dr. Ram Narayan Sharma
ISBN 978-81-7854-247-8
Edition 2013
Language Hindi

Format Price Discount New Price *
Hardbound Rs. 550.00
20%
Rs. 440.00
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Discription
प्रारम्भिक बौद्धदर्शन एवं मानववाद सात अध्यायों में विभक्त है।
प्रथम अध्याय में पाश्चात्य तथा भारतीय दार्शनिकों द्वारा मानववाद के सम्बन्ध में दी गयी विभिन्न परिभाषाओं का अनुशीलन किया गया है।
द्वितीय अध्याय में बुद्ध के गंभीर उपदेश चार आर्य सत्य—दुःख, दुःख का कारण, दुःख निरोध और दुःख निरोध का उपाय आदि पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया है।
तृतीय अध्याय में मनुष्य की महिमा एवं गरिमा को प्रतिपादित करते हुए यह बताया गया है कि मनुष्य स्वयं अपना भाग्य विधाता है। इसके लिए किसी देव या ईश्वर पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है।
चतुर्थ अध्याय में कर्म के महत्त्व को बताया गया है। मनुष्य, यहाँ तक कि देवता भी कर्मफल के अधीन हैं। कर्म के अनुसार ही उन्हें ऊँच या नीच भव में जन्म लेना पड़ता है। कर्म का फल अनिरुद्ध है।
पंचम अध्याय में प्रारम्भिक बुद्धदेशना में अन्तर्निहित मानववाद के साथ कुछ प्रमुख समकालीन भारतीय मानववादी चिन्तकोंµजैसे विवेकानन्द, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गाँधी, राधाकृष्णन और मानवेन्द्र नाथ राय के मानववादी विचारों की तुलना की गई है।
षष्ठ अध्याय में बौद्धों के चार ब्रह्मविहारोंµ मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा की व्याख्या विस्तृत रूप से की गई है। इसके साथ ही साथ अस्तित्ववाद एवं अर्थ-क्रियावाद तथा प्रारम्भिक बुद्धदेशना में अन्तर्निहित मानववाद के मध्य साम्य और वैषम्य दिखाया गया है।
सप्तम अध्याय में यह दिखाया गया है कि मानववादी विचारों के अभ्यास करने से कैसे मनुष्य को सर्वतोभावेन शांति प्राप्ति हो सकती है।
 

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