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Mahabharat Main Varnita Rajya Ke Saptanga
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Mahabharat Main Varnita Rajya Ke Saptanga
महाभारत में वर्णित राज्य के सप्ताङ्ग 
Author Dr. Manju Narang
ISBN 978-81-7854-252-2
Edition 2013
Language Hindi

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Hardbound Rs. 450.00
20%
Rs. 360.00
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Discription

महाभारत समग्र भारतीय वाङमय का मुकुट स्वरूप ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ महद् ज्ञान के भण्डार के रूप में प्रतिष्ठित है। राज्य एक अति महान् तन्त्र होता है। स्वयं को वशीभूत करने में असमर्थ तथा क्रूर प्रकृति वाले व्यक्तियों के द्वारा इसको वहन करना दुष्कर होता है। राजा, अमात्य, कोश, राष्ट्र मित्र नगर अथवा दुर्ग तथा सेना ये राज्य के सप्ताङ्ग होते हैं। इनसे युक्त राज्य के विपरीत आचरण करने वाला व्यक्ति गुरु अथवा मित्र होते हुए भी वध्य माना जाता है। राजा मनुष्यों का अधिपति, सनातन देव स्वरूप, धर्म का रक्षक तथा राज्य का प्रमुख अङ्ग माना जाता है। अमात्य की प्राप्ति राजा के लिये द्वितीय बल स्वरूप होती है। राष्ट्र का योग क्षेम राजा के अधीन होता है। कोश से धन की अभिवृद्धि होती है, राज्य की मूल सुदृढ़ होती है तथा राज्य समृद्ध होता है मित्र की प्राप्ति राज्य रक्षा के लिये शक्ति का ड्डोत स्वरूप होती है। सेना से राज्य को सुरक्षा तथा सुदृढ़ता की प्राप्ति होती है। राज्य की समृद्धि तथा सुरक्षा के लिये नगर अथवा दुर्ग का निर्माण आवश्यक होता है। अतएव राज्य के सप्ताङ्ग परस्पर पूरक होते हैं। इसी महत्व को दृष्टि में रखते हुए महाभारत में वर्णित राज्य के सप्ताङ्गों का विवेचन प्रस्तुत पुस्तक में किया गया है।

 

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