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Sanskrit Vanmaya Main Sanya Vyastha
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Sanskrit Vanmaya Main Sanya Vyastha
संस्कृत वांगमय में सैन्य व्यवस्था 
Author Manju Narang
ISBN 81-7854-106-8
Edition 2006
Language Hindi & Sanskrit

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Hardbound Rs. 1200.00
20%
Rs. 960.00
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Discription

संस्कृत वांगमय अगाध ज्ञान भण्डार, समृद्ध साहित्य तथा अगणित रचनाओं के लिये अप्रतिम एवम् अद्वितीय है। राज्य व्यवस्था के सप्तंगों में सेना राष्ट्र की रीढ़ मानी जाती है। अनेक विषम स्थितियों में जब युद्ध अनिवार्य एवम् अपरिहार्य हो जाता है, ऐसे विषम काल में सैन्य-बल की आवश्यकता होती है। वेद कालिक सैन्य व्यवस्था सुदृढ़ एवं तकनीकी दृष्टि से सुविकसित थी। नीति नियामक ग्रन्थ होने के कारण स्मृतियों में सैन्य व्यवस्था सम्बन्धी सैद्धान्तिक विवरण प्राप्त होते हैं। रामायण में भूमि, सोना तथा चाँदी को युद्ध का कारण माना गया है। युद्ध प्रधान ग्रन्थ होने के कारण महाभारत में शस्त्रत्रें की विविधता एवं उनकी शिक्षा, निर्माण एवम् उपयोग विधि का तथा महासंग्राम का सविस्तर वर्णन उपलब्ध होता है। पुराणों में नारी शक्ति को महिमामण्डित किया है। स्त्रियाँ सक्रिय रूप से युद्ध में भाग लिया करती थीं तथा विजय सुख का उपभोग किया करती थीं। पुरुषार्थ चतुष्टय के निरूपण, कर्तव्याकर्तव्य के ज्ञान, राज्य तन्त्र की सुरक्षा तथा राज्य प्राप्ति हेतु नीति साहित्य अवलोकनीय है। कथा साहित्य में शस्त्रस्त्रें की उन्नत तथा विकसित तकनीक का वर्णन प्राप्त होता है। इस पुस्तक में वेद, स्मृतियों, रामायण, महाभारत, पुराण, नीति साहित्य तथा कथा साहित्य में वर्णित सैन्य व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है।

 

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