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Saundryanubhuti Evm Kavyarachnain
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Saundryanubhuti Evm Kavyarachnain
सौन्दर्यानुभूति एवं काव्यरचनाएं 
Author Acharya Pushpendra
ISBN 978-81-7854-198-3
Edition 2012
Language Hindi

Format Price Discount New Price *
Hardbound Rs. 550.00
20%
Rs. 440.00
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Discription

सौन्दर्यशास्त्र का सम्बन्ध सौन्दर्य के सम्पूर्ण क्षेत्र से माना जाता है। मानवता की सामान्य भूमि पर पहुँची हुई संसार की सभी सभ्यजातियों में सौंदर्य के सामान्य आदर्श प्रतिष्ठित हैं। भेद अधिकतर अनुभूति की मात्रा में पाया जाता है। न तो कोई कुरूप को  सुन्दर कहता है। सौन्दर्य का दर्शन व्यक्ति मनुष्य में ही नहीं करता है। प्रत्युत पल्लवगुंपिफत पुष्पहास में, पक्षियों के पँखों में, सिन्दूर संध्यादिगंचल के हिरण मेखला मण्डित घनखंड में, तुषारवृत्त तुंगगिरी शिखर में, चन्द्रकिरण से झलझलाते निर्झर में और न जाने कितनी वस्तुओं में यह सौन्दर्य झलक पाता है। समस्त कला में सौन्दर्य तत्त्व और आनन्द तत्त्व विद्यमान रहता है। इस में सन्देह नहीं कलाकृतियों के सौन्दर्य में रूप महत्त्वपूर्ण होता है। साहित्य सौन्दर्य की अभिव्यक्ति का साधन है। सौन्दर्य मनुष्य की अनुभूति है। रंगीन पुष्प, वृक्षों से सुशोभित हिमालय पर्वत की उपत्यकाएँ, अनेक प्रकार के पुष्पों से पुष्पवाहिका मनुष्य आनन्दविभोर प्रियतम को लुभाते तथा आकर्षित करते। तथा जिसे पाकर प्रिय अपने को भाग्यशाली समझते हैं वही सौन्दर्य हैं।

 

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