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Shri Bhagvadgita Main Vaiganika Chintan
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Shri Bhagvadgita Main Vaiganika Chintan
श्रीमद्भगवद्गीता में वैज्ञानिक चिन्तन 
Author Dr. Shanta Prashad Parashar
ISBN 978-81-7854-223-2
Edition 2012
Language Hindi

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Hardbound Rs. 750.00
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Rs. 600.00
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Discription

‘श्रीमद्भगवद्गीता में वैज्ञानिक चिन्तन’ शीर्षक से सम्पन्न यह ग्रन्थ अपनी अलग ही पहचान बनाता है। गीता विषयक शताधिक समीक्षा ग्रन्थ प्रकाशित है। इसमें रचनाकार का गीता विषयक अध्यात्म समन्वित एवं व्यवहार सम्मत वैज्ञानिक चिन्तन प्रस्तुत है। यह चिन्तन लोक हितैषी, सरलता से आत्मसात करने योग्य एवं सहज आचरणीय है। यह प्रेय और श्रेय दोनों ही दृष्टियों से उपादेय है। श्रीमद्भगवद्गीता अध्यात्म का ग्रन्थ मान्य है। अध्यात्मविद्या ही मानव के लिये ग्रहणीय है, क्योंकि अध्यात्मविज्ञान समस्त विद्याओं का आश्रय है। यथोल्लेख है कि- प्रदीपः सर्वविद्यानामुपायः सर्वकर्मणाम्।  आश्रयः सर्वधर्माणां शाश्वदान्वीक्षिकी मता।। कौटिलीय-अर्थशास्त्र, विनयाधिकरण 2-1 गीता विषयक अध्यात्म-विज्ञान के व्यावहारिक रूप को प्रस्तुत कर उससे मानव का साक्षात्कार कराने का सदुपक्रम किया है, एवं यह स्पष्ट कर दिखाया है कि गीता मात्र धर्म का ग्रन्थ ही नहीं, अपितु, मानव कल्याण का श्रेष्ठ साधन है। आपने इस सुकृति में गीतोल्लिखित संदर्भों के माध्यम से मानव के भौतिक, सूक्ष्मशरीर एवं मनोविज्ञान सम्बन्धी चिन्तन को निरूपित कर मानव को उसके अन्तः वाह्य से सुपरिचित कराने का सुयत्न तो किया ही है, साथ ही मनुष्य की आधिव्याधियों के आगम, निदान तथा निराकरण के आयाम-पुनर्जन्म, भक्ति, कर्म, ज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, आत्म तथा परमात्म-चिन्तन प्रस्तुत कर एक सही दिशा का परिज्ञान कराया है।

 

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