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Valmiki Ramayana Main Paryavaran Chetna
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Valmiki Ramayana Main Paryavaran Chetna
वाल्मीकि रामायण में पर्यावरण चेतना 
Author Anjana Singh
ISBN 978-81-7854-172-3
Edition 2009
Language

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Discription

डॉ-(सुश्री) अंजनासिंह द्वारा लिखित यह ग्रन्थ रामायणोल्लिखित पर्यावरण पावि=य के संरक्षण सम्बन्धी अनेक सुन्दर सूत्रें एवं सूक्तियों को प्रस्तुत करता है। वर्तमान में पर्यावरण-प्रदूषण महतीसमस्या के रूप में दृष्टिगोचार है। वाल्मीकिरामायणानुसार तत्कालिक समाज में मानव न तो एकांगी था और न ही स्वार्थपरायण। उस समय मानवीय सद्जीवनमूल्य अपना महत्त्व रखते थे, इसी कारण से असद्वृत्तियों पर सद्वृत्तियों को विजय प्राप्त हुई थी। रामायणकाल में मानव-मानव में तथा मानव और प्रकृति के सभी अंग-उपांगों में आत्मीयभाव एवं निःस्वार्थ सम्बन्ध होने के कारण मानव दयार्द्र एवं करुणाभावोपेत था। इससे मानवसमाज में स्नेहिल वातावरण होने के साथ उसका प्रकृति प्रेम भी अथाह था। अतएव मानव समाज भी सुखी था एवं प्रकृति भी कुसुमित, फलित एवं प्रफुल्लित थी। ‘प्रसन्नता’ पर्यावरण की पवित्रता का प्रतीक है, जिसकी उपलब्धि तत्कालीन समाज को थी। तत्कालिक मानवसमाज के मानवीय गुण प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखिका ने मूलकृति के गहन चिन्तन से आज के समाज के समक्ष लोकहितार्थ प्रस्तुत कर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं समाजपयोगी कार्य किया है। लेखिका का यह शोधपूर्ण सद्ग्रन्थ पर्यावरण को पवित्र बनाने के रामायणोल्लित आयामों को प्रत्यक्ष करने की दृष्टि से सदुपयोगी सिद्ध होगा एवं मानव समाज के लिए प्रकाशस्तम्भ का कार्य करेगा ऐसा पूर्ण विश्वास है।

 

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