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Valmikiramayana Ke Vaigyanika Upadeyata
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Valmikiramayana Ke Vaigyanika Upadeyata
वाल्मीकिरामायण की वैज्ञानिक उपादेयता 
Author Dr. Vishnu Narayana Tiwari
ISBN 978-81-7854-224-9
Edition 2012
Language Hindi

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Hardbound Rs. 750.00
20%
Rs. 600.00
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Discription

वाल्मीकिरामायण में वर्णित मानव से सम्बन्धित भौतिक, अध्यात्मिक, लौकिक, अलौकिक, प्रकृति- जन्य तथा पर्यावरणीय तत्त्वों का विश्लेषण एवं चिन्तन प्रस्तुत है। सिद्ध महाकवि अपने काव्य के माध्यम से मनुष्य समाज में मानवता की स्थापना के मन्त्र प्रस्तुत करता है एवं समीक्षक उन मन्त्रों या सुविचारों का अभिधात्मक रूप से पाठक से साक्षात्कार कराता है। ज्ञान का विश्लेषण विज्ञान है। ‘विज्ञान’ बुद्धिसम्मत विषय का व्यवहारिक विवेचन है। यह भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही वस्तुओं का विश्लेषण करता है। डॉö तिवारी ने अध्यात्मज्ञान हेतु जहाँ श्रीमद्वाल्मीकिरामायण में वर्णित सत्य रूप धर्म से साक्षात्कार कराने का सुयत्न किया है, वहीं भौतिकसुख, शान्ति एवं समृद्धि के विविधायामों से भी परिचय कराया है। रामायण में वर्णित भौतिक एवं रसायनविज्ञान सम्बन्धी तत्त्वों के साथ-साथ आपने तत्रोल्लिखित आयुर्विज्ञान एवं आनुवांशिक चिन्तन को भी प्रस्तुत कर नवीन दिशा को उपलक्षित किया है। आपने मूल कृति में वर्णित मनोविज्ञान, अपराधविज्ञान, ज्योतिर्विज्ञान, वास्तु एवं सैन्यविज्ञान सम्बन्धित प्रसंगों के आधार पर उनका अनुसन्धानात्मक समीक्षण प्रस्तुत कर मानव समाज को तद्धितार्थ सुचिन्तन दिया है। इससे कृति की उपयोगिता सहज सिद्ध है। ‘वाल्मीकिरामायण की वैज्ञानिक उपादेयता’ मानव-समाज के अन्तः एवं बाह्य, लौकिक तथा पारलौकिक, भौतिक और आध्यात्मिक सभी रूपों का विश्लेषणात्मक चिन्तन प्रस्तुत करता है। पुरुषार्थ चतुष्टय की उपलब्धि की दृष्टि से यह ग्रन्थ पठनीय एवं चिन्तनीय है। यह सुधी-समाज में समादृत होगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।

 

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