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Bhasha Aur Somdevabhatta Ka Udyana
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Bhasha Aur Somdevabhatta Ka Udyana
भास और सोमदेवभट्ट का उदयन 
Author Dr. Nivaran Mahatha
ISBN 978-81-7854-215-7
Edition 2012
Language Hindi & Sanskrit

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Hardbound Rs. 750.00
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Discription
संस्कृत साहित्य में कथा-साहित्य का अपना एक विशिष्ट स्थान है। भारतीय कथासाहित्य की लोकप्रियता सम्पूर्ण विश्व में छायी हुई है। कथाओं का प्रारम्भ भारत से हुआ और सम्पूर्ण विश्व में फैल गया। कथासरित्सागर, बृहत्कथामंजरी, भोज- प्रबन्ध, पंचतंत्र, कथामुक्तावली, कथामंजरी, जातकमाला, बृहत्कथाकोश तथा हितोपदेश आदि ग्रन्थ तो कथाओं के सागर हैं।
 
महाकवि भास ने उदयन-कथा को अपने नाटकों के माध्यम से और भी अधिक लोकप्रिय बनाया है। ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ और ‘स्वप्नवासवदत्त’ दोनों ही नाटकों में उदयन की प्रेमकथा वर्णित है। ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ में उदयन तथा वासवदत्ता की प्रेमकथा के साथ ही यौगन्धरायण की कार्य कुशलता पर अधिक महत्त्व दिया गया है। फलतः इस नाटक का नामकरण भी उसी के नाम से किया गया है। ‘स्वप्नवासवदत्त’ उसी का पूरक ग्रन्थ है।
 
प्रस्तुत ग्रन्थ सात अध्यायों में विभक्त है। प्रथम अध्याय में भास का परिचय देते हुए उसके तेरह नाटकों की संक्षिप्त विषय-वस्तु प्रस्तुत की गई है। द्वितीय अध्याय में भास के उदयन- कथाश्रित नाटकों में ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ और ‘स्वप्नवासवदत्त’ नाटक की कथावस्तु विस्तार से प्रस्तुत की गई है। तृतीय अध्याय में बृहत्कथा- परम्परा में ‘कथासरित्सागर’ का महत्त्व और स्थान निर्धारित करते हुए सोमदेवभó का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया है। चतुर्थ अध्याय में ‘कथासरित्सागर’ में प्राप्त उदयन से सम्बन्धित आधिकारिक कथा और प्रासंगिक कथाओं का वर्णन करते हुए उसका मूल्यांकन किया गया है। पंचम अध्याय में ‘कथासरित्सागर’ में प्राप्त उदयन-कथा का ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ और ‘स्वप्नवासवदत्त’ में प्राप्त उदयन-कथा के साथ साम्य और वैषम्य प्रस्तुत किया गया है। षष्ठ अध्याय में भास के नाटकों में प्राप्त उदयन-कथा के अतिरिक्त ‘कथासरित्सागर’ मे प्राप्त तद्विषयक कथाओं के त्याग में सम्भावित कारण प्रस्तुत किये गये हैं। सप्तम अध्याय में भास और सोमदेवभट्ट की उदयन-कथाओं का भारतीय साहित्य में प्राप्त होने वाली उदयन-कथाओं के साथ संक्षिप्त सर्वेक्षण किया गया है।
 
 

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